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शनिवार, 2 दिसंबर 2017

मृत्युभोज पर एक लघु लेख जरूर पड़े

दिसंबर 02, 2017
* मृत्यु भोज पर एक लघु लेख भेजा है*  ,वह मुझे तो पसन्द आया।ऐसी सामाजि क कुरीति पर शानदार कटाक्ष किया है।आप भी पढे।)


जश्न-ऐ-मौत।मृत्यु भोज, एक सामाजिक कलंक !!!
          
         इंसान स्वार्थ व खाने के लालच में कितना गिरता है उसका नमूना होती है सामाजिक कुरीतियां। ऐसी ही एक पीड़ा देने वाली कुरीति वर्षों पहले भोले-भाल हिन्दुओ में फैलाई गई थी वो है -मृत्युभोज!!! मानव विकास के रास्ते में यह गंदगी कैसे पनप गयी, समझ से परे है। जानवर भी अपने किसी साथी के मरने पर मिलकर दुःख प्रकट करते हैं, इंसानी बेईमान दिमाग की करतूतें देखो कि यहाँ किसी व्यक्ति के मरने पर उसके साथी, सगे-सम्बन्धी भोज करते हैं। मिठाईयाँ खाते हैं। किसी घर में खुशी का मौका हो, तो समझ आता है कि मिठाई बनाकर, खिलाकर खुशी का इजहार करें, खुशी जाहिर करें। लेकिन किसी व्यक्ति के मरने पर मिठाईयाँ परोसी जायें, खाई जायें, इस शर्मनाक परम्परा को मानवता की किस श्रेणी में रखें? इंसान की गिरावट को मापने का पैमाना कहाँ खोजे? इस भोज के भी अलग-अलग तरीके  हैं। कहीं पर यह एक ही दिन में किया जाता है। कहीं तीसरे दिन से शुरू होकर बारहवें-तेहरवें दिन तक चलता है। कई लोग श्मशान घाट से ही सीधे मृत्युभोज का सामान लाने निकल पड़ते हैं। मैंने तो ऐसे लोगों को सलाह भी दी कि क्यों न वे श्मशान घाट पर ही टेंट लगाकर जीम लें ताकि अन्य जानवर आपको गिद्ध से अलग समझने की भूल न कर बैठे ! 


रिश्तेदारों को तो छोड़ो, पूरा गांव का गाँव व आसपास का पूरा क्षेत्र टूट पड़ता है खाने को! तब यह हैसियत दिखाने का अवसर बन जाता है। आस-पास के कई गाँवों से ट्रेक्टर-ट्रोलियों में गिद्धों की भांति जनता इस घृणित भोज पर टूट पड़ती है।


             जब मैंने समाज के बुजुर्गों से बात की व इस कुरीति के चलन के बारे में पूछा, तो उन्होंने बताया कि उनके जमाने में ऐसा नहीं था। रिश्तेदार ही घर पर मिलने आते थे। उन्हें पड़ोसी भोजन के लिए ले जाया करते थे। सादा भोजन करवा देते थे। मृत व्यक्ति के घर बारह दिन तक कोई भोजन नहीं बनता था। 13 वें दिन कुछ सादे क्रियाकर्म होते थे। परिजन बिछुड़ने के गम को भूलने के लिए मानसिक सहारा दिया जाता था। लेकिन हम कहाँ पहुंच गए! परिजन के बिछुड़ने के बाद उनके परिवार वालों को जिंदगीभर के लिए एक और जख्म दे देते है।जीते जी चाहे इलाज के लिए 2,00 रुपये उधार न दिए हो लेकिन मृत्युभोज के लिए 6-7 लाख का कर्जा ओढ़ा देते है। ऐसा नहीं करो तो समाज में इज्जत नहीं बचेगी! क्या गजब पैमाने बनाये हैं हमने इज्जत के? इंसानियत को शर्मसार करके, परिवार को बर्बाद करके इज्जत पाने का पैमाना! कहीं-कहीं पर तो इस अवसर पर अफीम की मनुहार भी करनी पड़ती है। इसका खर्च मृत्युभोज के बराबर ही पड़ता है। जिनके कंधों पर इस कुरीति को रोकने का जिम्मा है वो नेता-अफसर खुद अफीम का जश्न मनाते नजर आते है। कपड़ों का लेन-देन भी ऐसे अवसरों पर जमकर होता है। कपड़े, केवल दिखाने के, पहनने लायक नहीं। बाप एक का मरा पगड़ी पुरै परीवार ने पहन ली बरबादी का ऐसा नंगा नाच, जिस समाज में चल रहा हो, वहाँ पर पूँजी कहाँ बचेगी? बच्चे कैसे पढ़ेंगे?बीमारों का इलाज कैसे होगा?


         घिन्न आती है जब यह देखते हैं कि जवान मौतों पर भी समाज के लोग जानवर बनकर मिठाईयाँ उड़ा रहे होते हैं। गिद्ध भी गिद्ध को नहीं खाता! पंजे वाले जानवर पंजे वाले जानवर को खाने से बचते है। लेकिन इंसानी चोला पहनकर घूम रहे ये दोपाया जानवरों को शर्म भी नहीं आती जब जवान बाप या माँ के मरने पर उनके बच्चे अनाथ होकर, सिर मुंडाये आस-पास घूम रहे होते हैं। और समाज के प्रतिष्ठित लोग उस परिवार की मदद करने के स्थान पर भोज कर रहे होते हैं।

जब भी बात करते है कि इस घिनौने कृत्य को बंद करो तो समाज के ऐसे-ऐसे कुतर्क शास्त्री खड़े हो जाते है कि  इनके तर्क देखिए.....

A) माँ-बाप जीवन भर तुम्हारे लिए कमाकर गये हैं, तो उनके लिए हम कुछ नहीं करोगे ??

इमोशनल अत्याचार शुरू कर देते है! चाहे अपना बाप घर के कोने में भूखा पड़ा हो लेकिन यहां ज्ञान बांटने जरूर आ जाता है! हकीकत तो यह है कि आजकल अधिकांश माँ-बाप कर्ज ही छोड़ कर जा रहे हैं। उनकी जीवन भर की कमाई भी तो कुरीतियों और दिखावे की भेंट चढ़ गयी। फिर अगर कुछ पैसा उन्होंने हमारे लिए रखा भी है, तो यह उनका फर्ज था। हम यही कर सकते हैं कि जीते जी उनकी सेवा कर लें। लेकिन जीते जी तो हम उनसे ठीक से बात नहीं करते। वे खोंसते रहते हैं, हम उठकर दवाई नहीं दे पाते हैं। अचरज होता है कि वही लोग बड़ा मृत्युभोज या दिखावा करते हैं, जिनके माँ-बाप जीवन भर तिरस्कृत रहे। खैर! चलिए, अगर माँ-बाप ने हमारे लिए कमाया है, तो उनकी याद में हम कई जनहित के कार्य कर सकते हैं, पुण्य कर सकते हैं। जरूरतमंदो की मदद कर दें, अस्पताल-स्कूल के कमरे बना दें, पेड़ लगा दें।परन्तु हट्टे-कट्टे लोगों को भोजन करवाने से कैसा पुण्य होगा? कुछ बुजुर्ग तो दो साल पहले इस चिंता के कारण मर जाते है कि मेरी मौत पर मेरा समाज ही मेरे बच्चों को नोंच डालेगा! मरने वाले को भी शांति से नहीं मरने देते हो! कैसा फर्ज व कैसा धर्म है तुम्हारा ??

B) आये मेहमानों को भूखा ही भेज दें ??

पहली बात को शोक प्रकट करने आने वाले रिश्तेदार और मित्र, मेहमान नहीं होते हैं। उनको भी सोचना चाहिये कि शोक संतृप्त परिवार को और दुखी क्यों करें ?? अब तो साधन भी बहुत हैं। सुबह से शाम तक वापिस अपने घर पहुँचा जा सकता है। इस घिसे-पिटे तर्क को किनारे रख दें। मेहमाननवाजी खुशी के मौकों पर की जाती है, मौत पर नहीं!! बेहतर यही होगा कि हम जब शोक प्रकट करने जायें, तो खुद ही भोजन या अन्य मनुहार को नकार दें। समस्या ही खत्म हो जायेगी।

C) तुमने भी तो खाया था तो खिलाना पड़ेगा !!

यह मुर्ग़ी पहले आई या अंडा पहले आया वाला नाटक बंद करो। यह समस्या कभी नहीं सुलझेगी! अब आप बुला लो, फिर वे बुलायेंगे। फिर कुछ और लोग जोड़ दो। इनसानियत पहले से ही इस कृत्य पर शर्मिंदा है, अब और मत करो। किसी व्यक्ति के मरने पर उसके घर पर जाकर भोजन करना ही इंसानी बेईमानी की पराकाष्ठा है और अब इतनी पढ़ाई-लिखाई के बाद तो यह चीज प्रत्येक समझदामर व्यक्ति को मान लेनी चाहिए। गाँव और क़स्बों में गिद्धों की तरह मृत व्यक्तियों के घरों में मिठाईयों पर टूट पड़ते लोगों की तस्वीरें अब दिखाई नहीं देनी चाहिए।

इस कुरीति को मिटाने का एक ही उपाय है कि

आओ आप और हम ये सपथ ले की हम इस प्रकार के आयोजनों में भोजन नही करेंगे
धन्यवाद   .
.सोच बदले .....समाज बदले ... ..
हम सुधरेंगे  ....समाज  सुधरेगा

मंगलवार, 17 अक्टूबर 2017

दीपावली के 5 पर्वो में धनतेरस सबसे पहला और बहुत महत्वपूर्ण पर्व है

अक्टूबर 17, 2017
★धनतेरस स्पेशल टिप्स★


दीपावली के 5 पर्वो में धनतेरस सबसे पहला और बहुत महत्वपूर्ण पर्व है। धनतेरस के दिन से ही घर में दीपमाला से सजावट शुरू हो जाती है।मान्यता है कि धनतेरस के दिन कुछ आसान से टोटको को करके माँ लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर देव की पूर्ण कृपा प्राप्त की जा सकती है। 

धनतेरस के इन चुपचाप किये गए कार्य अत्यंत प्रभावी एवं श्रेष्ठ सफलता दिलाने वाले होते है जो जरूर करे -

👉इस दिन किसी की आलोचना, झगड़े व वाद-विवाद की बात बिलकुल भी न करें न करें। अगर संभव हो तो पुरानी रंजिश या मन मुटाव को भुलाकर शत्रु को भी मित्र बनाने कि पहल करें इससे देवता प्रसन्न होते है और घर परिवार में शुभता आती है। 
👉धनतेरस के दिन अपने दायें हाथ के लिए एक चाँदी का कड़ा बनवाये,इस कड़े को दीवाली वाले दिन माँ लक्ष्मी का पूजन करते समय माँ के चरणों से लगा कर वहीँ पूजा में रख दें और उस पर भी तिलक लगा दें।अगले दिन सुबह स्नान करने के बाद माँ लक्ष्मी का ध्यान पूजा करने के बाद उसे दाहिने हाथ में धारण कर लें।आप अति शीघ्र अपने अन्दर ज्यादा आत्मविश्वास का अनुभव करेंगे, आपकी आर्थिक स्थिति भी और भी ज्यादा मजबूत होने लगेगी। 
👉यदि आपको आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है तो आप धनतेरस दीपावली इन दिन संध्या में लगातार श्री गणेश स्त्रोत्र का पाठ करें उसके उपरांत गाय को कोई भी हरी सब्जी या चारा डालें,जल्दी ही आपकी आर्थिक बाधाएं हल होने लगेंगी। 
👉धनतेरस के दिन अपने,अपने परिवार के खरीददारी अवश्य ही करें लेकिन इस दिन किसी भी बाहरी व्यक्ति के लिए भी उपहार ना खरीदें।अगर आप को किसी को कोई भी उपहार देना है तो उसे आप पहले ही खरीद लें उस दिन ना खरीदें। 
👉जीवन में हर प्रकार से उन्नति करने के लिए धनतेरस के दिन व्यक्ति को चाँदी में निर्मित एवं प्राण प्रतिष्ठित नवरत्न लाकेट खरीदकर इसे घर में लाकर मंदिर में रख देना चाहिए।फिर इसे दीपावली के दिन माँ लक्ष्मी कि पूजा के बाद धारण करना चाहिए।इससे जातक को माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश कि कृपा से सभी दिशाओं से सुख समृद्धि और सफलता कि प्राप्ति होती है।यह लाकेट आप धनतेरस से दीवाली किसी भी दिन खरीद सकते है। 
👉भाग्य चमकाने के लिए धनतेरस के दिन चांदी की दो ठोस गोलियां बनवाएं और उसे पूजा घर में रख दें फिर दीपावली के दिन पूजा के समय उन चाँदी की गोलियों की भी पूजा करके उन्हें सदैव अपने पास रखें।इस उपाय से भाग्य प्रबल होता है, कार्यो में श्रेष्ठ सफलता मिलती है। 
👉धनतेरस के दिन सांयकाल लक्ष्मी पूजन के बाद दक्षिणवर्ती शंख में चावल के दाने और गुलाब की पंखुड़ियाँ डाल दें इससे धन लाभ होता है। 
👉धनतेरस वाले दिन से दीपावली के पाँचों दिनों में लक्ष्मी पूजा में माँ लक्ष्मी को लौंग का जोड़ा अवश्य ही अर्पित करें,इससे कभी भी धन की कमी नहीं होती है। 
धनतेरस वाले दिन सफ़ेद वस्तुओं जैसे चीनी, चावल, आटा,घी और सफ़ेद वस्त्र जो भी संभव हो उसका दान अवश्य ही करें इससे माँ लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होती है, कार्यों की बाधाएं दूर होती है,ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। 
👉धनतेरस या दिवाली के दिन कोई भी किन्नर दिखे तो उसे कुछ ना कुछ दान अवश्य ही करें और उससे अनुरोध करके एक रुपया ले ले।इस सिक्के को अपने पर्स में या तिजोरी में रखे इससे लाभ लाभ के योग बनते है। 
👉दीपावली के 5 दिनों में यदि कोई भी जमादार या गरीब असहाय,मांगने वाला आपके घर में आ जाय तो उसे खाली ना भेजे उसे कुछ ना कुछ अवश्य ही दान में दें। इससे माँ लक्ष्मी और कुल देवता का आशीर्वाद मिलता है, उस जातक को जीवन में धन की कोई भी कमी नहीं रहती है, कार्यों में श्रेष्ठ सफलता मिलती है। 
👉आने वाले साल में आपकी आर्थिक स्थिति कैसी रहेगी यह एक आसान से उपाय से जाना जा सकता है। धनिया माँ लक्ष्मी को बहुत प्रिय है मान्यता है कि जिस घर में साबुत धनिया होता है वहाँ पर माँ लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।धनतेरस के दिन 5 रुपए या 50 ग्राम साबुत धनिया खरीदकर इसे पूजा घर में रखें, दीपावली की रात माँ लक्ष्मी के सामने उस साबुत धनिया की पूजा करें फिर दीवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा पर उस साबुत धनिया को अपने घर के गमले में या लान में बिखेर दें और उससे जो पौधा निकले उसकी सेवा करें।ऐसी मान्यता है कि यदि उस साबुत धनिया से हरा भरा पौधा निकलता है तो घर में धन-समृद्धि आती है।अगर धनिया का पौधा सामान्य,पतला निकलता है तो आय सामान्य रहेगी और यदि पौधा नहीं निकलता है या पीला कमजोर निकलता है तो आर्थिक कठनाइयों सामने आती है।

रविवार, 15 अक्टूबर 2017

रामचरित मानस के कुछ रोचक तथ्य जो जानना बहुत जरूरी है

अक्टूबर 15, 2017
🏹🏹🏹🏹🏹🏹कभी सोचा है की प्रभु 🏹🏹श्री राम के दादा परदादा का नाम क्या था?
नहीं तो जानिये-
1 - ब्रह्मा जी से मरीचि हुए,
2 - मरीचि के पुत्र कश्यप हुए,
3 - कश्यप के पुत्र विवस्वान थे,
4 - विवस्वान के वैवस्वत मनु हुए.वैवस्वत मनु के समय जल प्रलय हुआ था,
5 - वैवस्वतमनु के दस पुत्रों में से एक का नाम इक्ष्वाकु था, इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस प्रकार इक्ष्वाकु कुलकी स्थापना की |
6 - इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि हुए,
7 - कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था,
8 - विकुक्षि के पुत्र बाण हुए,
9 - बाण के पुत्र अनरण्य हुए,
10- अनरण्य से पृथु हुए,
11- पृथु से त्रिशंकु का जन्म हुआ,
12- त्रिशंकु के पुत्र धुंधुमार हुए,
13- धुन्धुमार के पुत्र का नाम युवनाश्व था,
14- युवनाश्व के पुत्र मान्धाता हुए,
15- मान्धाता से सुसन्धि का जन्म हुआ,
16- सुसन्धि के दो पुत्र हुए- ध्रुवसन्धि एवं प्रसेनजित,
17- ध्रुवसन्धि के पुत्र भरत हुए,
18- भरत के पुत्र असित हुए,
19- असित के पुत्र सगर हुए,
20- सगर के पुत्र का नाम असमंज था,
21- असमंज के पुत्र अंशुमान हुए,
22- अंशुमान के पुत्र दिलीप हुए,
23- दिलीप के पुत्र भगीरथ हुए, भागीरथ ने ही गंगा को पृथ्वी पर उतारा था.भागीरथ के पुत्र ककुत्स्थ थे |
24- ककुत्स्थ के पुत्र रघु हुए, रघु के अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी नरेश होने के कारण उनके बाद इस वंश का नाम रघुवंश हो गया, तब से श्री राम के कुल को रघु कुल भी कहा जाता है |
25- रघु के पुत्र प्रवृद्ध हुए,
26- प्रवृद्ध के पुत्र शंखण थे,
27- शंखण के पुत्र सुदर्शन हुए,
28- सुदर्शन के पुत्र का नाम अग्निवर्ण था,
29- अग्निवर्ण के पुत्र शीघ्रग हुए,
30- शीघ्रग के पुत्र मरु हुए,
31- मरु के पुत्र प्रशुश्रुक थे,
32- प्रशुश्रुक के पुत्र अम्बरीष हुए,
33- अम्बरीष के पुत्र का नाम नहुष था,
34- नहुष के पुत्र ययाति हुए,
35- ययाति के पुत्र नाभाग हुए,
36- नाभाग के पुत्र का नाम अज था,
37- अज के पुत्र दशरथ हुए,
38- दशरथ के चार पुत्र राम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न हुए |
इस प्रकार ब्रह्मा की उन्चालिसवी (39) पीढ़ी में श्रीराम का जन्म हुआ | शेयर करे ताकि हर हिंदू इस जानकारी को जाने..


🏹रामचरित मानस के कुछ रोचक तथ्य🏹

1:~मानस में राम शब्द = 1443 बार आया है।
2:~मानस में सीता शब्द = 147 बार आया है।
3:~मानस में जानकी शब्द = 69 बार आया है।
4:~मानस में बैदेही शब्द = 51 बार आया है।
5:~मानस में बड़भागी शब्द = 58 बार आया है।
6:~मानस में कोटि शब्द = 125 बार आया है।
7:~मानस में एक बार शब्द = 18 बार आया है।
8:~मानस में मन्दिर शब्द = 35 बार आया है।
9:~मानस में मरम शब्द = 40 बार आया है।

10:~लंका में राम जी = 111 दिन रहे।
11:~लंका में सीताजी = 435 दिन रहीं।
12:~मानस में श्लोक संख्या = 27 है।
13:~मानस में चोपाई संख्या = 4608 है।
14:~मानस में दोहा संख्या = 1074 है।
15:~मानस में सोरठा संख्या = 207 है।
16:~मानस में छन्द संख्या = 86 है।

17:~सुग्रीव में बल था = 10000 हाथियों का।
18:~सीता रानी बनीं = 33वर्ष की उम्र में।
19:~मानस रचना के समय तुलसीदास की उम्र = 77 वर्ष थी।
20:~पुष्पक विमान की चाल = 400 मील/घण्टा थी।
21:~रामादल व रावण दल का युद्ध = 87 दिन चला।
22:~राम रावण युद्ध = 32 दिन चला।
23:~सेतु निर्माण = 5 दिन में हुआ।

24:~नलनील के पिता = विश्वकर्मा जी हैं।
25:~त्रिजटा के पिता = विभीषण हैं।

26:~विश्वामित्र राम को ले गए =10 दिन के लिए।
27:~राम ने रावण को सबसे पहले मारा था = 6 वर्ष की उम्र में।
28:~रावण को जिन्दा किया = सुखेन बेद ने नाभि में अमृत रखकर।

शुक्रवार, 13 अक्टूबर 2017

कुछ आवश्यक वास्तु टिप्स-जरूर पढ़ें

अक्टूबर 13, 2017
कुछ आवश्यक वास्तु टिप्स🔴

💥१. घर में सुबह सुबह कुछ देर के लिए भजन अवशय लगाएं ।
💥२. घर में कभी भी झाड़ू को खड़ा करके नहीं रखें, उसे पैर नहीं लगाएं, न ही उसके ऊपर से गुजरे अन्यथा घर में बरकत की कमी हो जाती है। झाड़ू हमेशा छुपा कर रखें |
💥३. बिस्तर पर बैठ कर कभी खाना न खाएं, ऐसा करने से धन की हानी होती हैं। लक्ष्मी घर से निकल जाती है1 घर मे अशांति होती है1
💥४. घर में जूते-चप्पल इधर-उधर बिखेर कर या उल्टे सीधे करके नहीं रखने चाहिए इससे घर में अशांति उत्पन्न होती है।
💥५. पूजा सुबह 6 से 8 बजे के बीच भूमि पर आसन बिछा कर पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठ कर करनी चाहिए । पूजा का आसन जुट अथवा कुश का हो तो उत्तम होता है |
💥६. पहली रोटी गाय के लिए निकालें। इससे देवता भी खुश होते हैं और पितरों को भी शांति मिलती है |
💥७.पूजा घर में सदैव जल का एक कलश भरकर रखें जो जितना संभव हो ईशान कोण के हिस्से में हो |
💥८. आरती, दीप, पूजा अग्नि जैसे पवित्रता के प्रतीक साधनों को मुंह से फूंक मारकर नहीं बुझाएं।
💥९. मंदिर में धूप, अगरबत्ती व हवन कुंड की सामग्री दक्षिण पूर्व में रखें अर्थात आग्नेय कोण में |
💥१०. घर के मुख्य द्वार पर दायीं तरफ स्वास्तिक बनाएं |
💥११. घर में कभी भी जाले न लगने दें, वरना भाग्य और कर्म पर जाले लगने लगते हैं और बाधा आती है |
💥१२. सप्ताह में एक बार जरुर समुद्री नमक अथवा सेंधा नमक से घर में पोछा लगाएं | इससे नकारात्मक ऊर्जा हटती है |
💥१३. कोशिश करें की सुबह के प्रकाश की किरणें आपके पूजा घर में जरुर पहुचें सबसे पहले |
💥१४. पूजा घर में अगर कोई प्रतिष्ठित मूर्ती है तो उसकी पूजा हर रोज निश्चित रूप से हो, ऐसी व्यवस्था करे |

"पानी पीने का सही वक़्त".
(1) 3 गिलास सुबह उठने के बाद,
.....अंदरूनी उर्जा को Activate
करता है...
(2) 1 गिलास नहाने के बाद,
......ब्लड प्रेशर का खात्मा करता है...
(3) 2 गिलास खाने से 30 Minute पहले,
........हाजमे को दुरुस्त रखता है..
(4) आधा गिलास सोने से पहले,
......हार्ट अटैक से बचाता है..

सावित्रीबाई ज्‍योतिराव फुले के जीवन की खास 9 बातें...-जरूर पढ़ें

अक्टूबर 13, 2017
देश की पहली महिला शिक्षक, समाज सेविका, कवि और वंचितों की आवाज उठाने वाली सावित्रीबाई ज्‍योतिराव फुले के जीवन की खास 9 बातें...

1. इनका जन्‍म 3 जनवरी, 1831 में दलित परिवार में हुआ था.
2. 1840 में 9 साल की उम्र में सावित्रीबाई की शादी 13 साल के ज्‍योतिराव फुले से हुई.
3. सावित्रीबाई फुले ने अपने पति क्रांतिकारी नेता ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर लड़कियों के लिए 18 स्कूल खोले. उन्‍होंने पहला और अठारहवां स्कूल भी पुणे में ही खोला.
4. सावित्रीबाई फुले देश की पहली महिला अध्यापक-नारी मुक्ति आंदोलन की पहली नेता थीं.
5. उन्‍होंने 28 जनवरी 1853 को गर्भवती बलात्‍कार पीडि़तों के लिए बाल हत्‍या प्रतिबंधक गृह की स्‍थापना की.


6. सावित्रीबाई ने उन्नीसवीं सदी में छुआ-छूत, सतीप्रथा, बाल-विवाह और विधवा विवाह निषेध जैसी कुरीतियां के विरुद्ध अपने पति के साथ मिलकर काम किया.सावित्रीबाई फुले ने आत्महत्या करने जाती हुई एक विधवा ब्राह्मण महिला काशीबाई की अपने घर में डिलवरी करवा उसके बच्चे यशंवत को अपने दत्तक पुत्र के रूप में गोद लिया. दत्तक पुत्र यशवंत राव को पाल-पोसकर इन्होंने डॉक्टर बनाया.
7. महात्मा ज्योतिबा फुले की मृत्यु सन् 1890 में हुई. तब सावित्रीबाई ने उनके अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिये संकल्प लिया.
8. सावित्रीबाई की मृत्यु 10 मार्च 1897 को प्लेग के मरीजों की देखभाल करने के दौरान हुई.
9. उनका पूरा जीवन समाज में वंचित तबके खासकर महिलाओं और दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष में बीता. उनकी एक बहुत ही प्रसिद्ध कविता है जिसमें वह सबको पढ़ने लिखने की प्रेरणा देकर जाति तोड़ने और ब्राह्मण ग्रंथों को फेंकने की बात करती हैं...